Sunday, December 22, 2019

CAB /CAA अर्थात वसुधैव कुटुम्बकम् ............
एक बार फिर समय ने कहा और अपने आप को दोहराया मैं समय हूँ , मैं वो समय जो हर पल हर क्षण को इतिहास बनाता हैं......                      मेरा वो भारत का इतिहास जो वेदो मे उपनिषदों मे और न जाने विश्व के कितने ही दबे कुचले गये लोगो के मन मे ये बात बैठा कर गया, जब मेरा कोई न होगा तब इस धरती पर भारत है, जो शोषितों को कहता है ,आओ मेरे बच्चो मैं तुम्हारी माँ और माँ आत्मसात करती है पीड़ा को हरती है दुखो को......
भारत की संकल्पना और आत्मा ही वसुधैव कुटुम्बकम् हैं तभी ओर पूरा विश्व जनता हैं हमारी संस्कृति को ओर हम सभी कहते भी हैं.......
अयं निज: परो वेति गणना लघुचेतसाम् ।
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ॥
ayam nijaH paro veti gaNanaa laghuchetasaam
udaaracharitaam tu vasudhaiva kutumbakam
CAB पारित हुआ कानून बना ओर भारत की संस्कृति की पहचान फिर विश्व मे बना गया , जैसे कभी स्वामी विवेकानंद ने विश्व के समक्ष भारत की धर्मधुरा का डंका बजाया था पूरे विश्व मे ......
इतिहास मे थोड़ा पीछे जाये, कही फंसीवाद,नाजीवाद पूरे विश्व मे धार्मिक असहिष्णुता थी, विश्व के सभी देश धर्म विशेष के लिए रक्तपात से कभी ना कतराये । जर्मन मे तो यहूदियो का नरसंहार पूरा विश्व जनता है । अपने ही देश की मिट्टी से बेघर कर दिये गये लोग । निकाल दिया गया उन्हे उस मिट्टी से सोचिये क्या पीड़ा हुई होगी ? अंत यही नही हुआ ये तो उन मनो,जनो, बच्चो, स्त्रियो को ही पता होगा क्या क्या अत्याचार हुए धर्म के आधार पर, दर्शन के आधार पर ............
समंदर मे दर दर की ठोकरे खायी जान बचाने को... किस किस देश के दर ना भटके वो लोग.....
1933 से 1938 तक लगभग 50000 लोगो ने जर्मन छोड़ दिया। यातना शिविर बनाये गये धर्म विशेष के लोगो के लिए या उनका दर्शन ना मानने वालों के लिये । 15000 यहूदियो को जहरीली गैस से मार दिया गया 1933 मे ।
1938-1941 तक मानसिक रूप से विकलांग 70000 जर्मनों को मर दिया गया। आउ शविज़- विरकेन्यू के यातना शिविर मे 2 से 3 मिलियन लोगो को मार दिया गया जिसमे यहूदी,जिप्सी,रूसी ओर पोलैंड वासी थे। इन सभी हत्याओ के पीछे नाजी दर्शन था ।
पूरा विश्व इजरायल और भारत के संबंधो को जनता पर ये संबंध है क्यो ?
जब धार्मिक आधार पर यहूदी प्रताड़ित हुए किसी देश ने शरण ना दी,जान बचाने को दर दर को ठोकरे खा रहे थे, हर देश दुत्कार रहा था उन्हे तब हमने शरण दी  तभी तो स्वामी विवेकानंद ने शिकागो भाषण में कहा था कि “मुझे गर्व है कि मैं उस देश से हूं, जिसने इस धरती के सभी देशों और धर्मों के परेशान और सताए हुए लोगों को अपने यहां शरण दी है। ”
“मुझे यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि हमने अपने हृदय में उन इजराइलियों की पवित्र यादों को संजोकर रखा है, जिनके धर्म स्थलों को रोमन हमलावरों ने तोड़कर खंडहर बना दिया था और तब उन्होंने दक्षिण भारत में शरण ली थी। ”
यहूदी भागकर इंग्लैंड भी गये, किसी मुस्लिम देश ने उनकी सहयता ना की भटकते भटकते भारत से आस थी केवल भारत के मानस पुत्रो ने उस समय भी निराश ना किया । हमने अपनी संस्कृति के अनुरूप उन्हे अपनाया यहूदीयो को गुजरात के जामनगर के राजा जाम साहिब दिग्विजय सिंह ने गुजरात में शरण दी तथा उनका भरण-पोषण करने की जिम्मेदारी भी अपने सर ली। इज़राइली आज भी भारत के आगे नतमस्तक इसलिये है क्योकि हमने उन्हे मानव माना उनके पुर्खों को सहारा दिया...
CAB भी धार्मिक उन्माद मे सताये लोगो के एक लिए आश्वासन है ओर ये विश्वास दिलाता हैं कि भारत आज भी पूरे विश्व को अपना परिवार मानता हैं।
मै भारत का वो समयचक्र हूँ जो विश्व को समय समय पर ये कहता हैं, विवेकशून्य मत बनो, भौतिकतावादी मत बनो, मन मे कटुता मत रखो, मन की कटुता ही विवेकशून्य बनाती हैं।
CAB सिद्ध करता हैं हमारे यहाँ धार्मिक उन्माद का कोई स्थान नही हैं, स्थान हैं तो मानवता का, पर भारत केवल उन्ही के लिये सहिष्णुता रखता  है जो वास्तव मे शोषित हैं ,अन्यथा ये वो भारत भी है जो वसुधैव कुटुम्बकम् कि भावना के साथ- साथ      “धर्म हिंसा तथैव च” के सिद्धांत का परिपालन करता हैं । भारत आत्मसात करता है सहिष्णुता को मानव धर्म को मानव ही नही तो वसुंधरा क्या ?
समय फिर कहता है मैं समय हूँ और दोहराता है मेरा कर्म हैं चरैवेति-चरैवेति, चरैवेति-चरैवेति ……………………….
 भवदीय
 विकास कुमार

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